*प्राणायाम के फायदे*
प्राणायाम सबसे बड़ा तप है। प्राणायाम को एक अनुष्ठान की तरह करना और प्राणों का आधान करते करते प्रभु की सम्पूर्ण दिव्यताओं का अपने भीतर आधान करना। प्राणायाम के महत्व को आप सभी जाने और दूसरों को इसके बारे में बताएं ताकि वो सभी अपनी दिनचर्या में प्राणायाम को शामिल करें और स्वस्थ रहें।
1. *कपालभाति प्राणायाम*
कपालभाति प्राणायाम रामबाण औषधी है। यह एक अकेला ऐसा प्राणायाम है जिसे करके आप 99 % बीमारिओं से मुक्ति पा सकते हैं चाहे वो शारीरक या मानसिक रोग हो। कपालभाति प्राणायाम करने से मोटापा, गैस, कब्ज, कोलाइटिस, पाइल्स, इनफर्टिलिटी, कैंसर, ओवरी में सिस्ट, यूट्रस में फाइब्रॉइडस, पोलिसिस्टिक ओवरीज़, मोतियाबिंद जैसी जानलेवा बीमारियां ठीक हो जाती है। कपालभाति प्राणायाम करने से हमारे शरीर के भीतर और बहार एक आध्यात्मिक ऊर्जा क्षेत्र तैयार हो जाता है। शरीर में किसी भी तरह की कमी चाहे वो न्यूट्रिएंट्स ,विटामिन्स, हीमोग्लोबिन, कैल्शियम, खून की कमी सब ठीक हो जाती हैं। व्याधियों को मिटने के साथ साथ समाँधी का सुख पाने के लिए, कुंडलिनी जागरण के लिए भी बहुत जरुरी हैं क्योंकि कपालभाति मुख्य रूप से आपकी आंतों को स्वस्थ बना देता है।
2. *अनुलोम विलोम*
अनुलोम विलोम करने से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक संतुलन होता है। इससे आपका आपके मन, शरीर, इन्द्रियों पर नियंत्र हो जाएगा। अनुलोम विलोम नाड़ियों की शुद्धि के लिए, नाड़ियों को शक्ति देने के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्राणायाम को निरंतर करने से पथरी, वात-पित्त-कफ दोष, ऑटोमन डिजीज, पैरालिसिस, डिप्रेसन, माइग्रेन पैन, हर्ट प्रॉब्लम, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, स्ट्रेस, स्किन सोरायसिस, ब्रोंकाइटिस, लंग फाइब्रोसिस जैसी लाइलाज बीमारियां ठीक हो जाती है। कुंडलिनी जागरण के लिए भी बहुत जरुरी हैं।अनुलोम विलोम देह को देवालय, शिवालय बना देता है।
3. *उज्जायी प्राणायाम*
उज्जायी प्राणायाम शरीर, मन इन्द्रियों के दोषों से, उनकी पराधीनताओं से मुक्त करके हमें उच्च चेतना से युक्त कर देता है। यह गले के अभ्यास, थाइरोइड, पेरा थाइरोइड, खर्राटें, गले के संक्रमण, टॉन्सिल और तुतलाहट के लिए अचूक औषध है। उज्जायी प्राणायाम आपको शांति प्रदान करता है और आत्मिक स्तर पर बहुत प्रभाव पड़ता है।
4. *भस्त्रिका प्राणायाम*
भस्त्रिका बहुत महत्वपूर्ण प्राणायाम है, यह मस्तिष्क से संबंधित सभी विकारों को मिटाने के लिए भी लाभदायक है। आँख, कान और नाक संबंधी सभी बीमारियों के लिए यह प्राणायाम लाभदायक है। इसे करने से वात, पित्त और कफ के दोष दूर होते हैं तथा पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की अच्छे से एक्सरसाइज हो जाती है।
5. *उद्गीथ प्राणायाम*
इस प्राणायाम का निरंतर अभ्यास करने से आपका सम्पूर्ण व्यक्तित्व ही सवर जाता है। उद्गीथ प्राणायाम से आपकी स्मरण शक्ति बढ़ने लगती है, मन व दिमाग शांत रहता है। आपको यदि नींद नहीं अति है तो इस प्राणायाम को करने से नीद अच्छी आती है। यह उच्च रक्तचाप और पेट से संबंधित सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में बहुत लाभदायक होता है।
6. *भ्रामरी प्राणायाम*
इस प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, यह बहुत ही लाभदायक है। भ्रामरी प्राणायाम करने से अनिद्रा, क्रोध, चिंता दूर होती है और बुद्धि भी बढ़ती है। यह प्राणायाम माइग्रेन, साइनोसाइटिस के लिए बहुत लाभदायक है। भ्रामरी प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करने से आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ती है और तनाव व डिप्रेशन दूर होता है।
7. *बाह्य प्राणायाम*
बाह्य प्राणायाम डायबिटीज, एसिडिटी, कब्ज, हर्निया जैसी बीमारियों में बहुत असरदायक है। इसका नियमित अभ्यास करने से पाचन शक्ति को मजबूत किया जा सकता है। बाह्य प्राणायाम से मष्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है और शरीर में फुर्ती आती है।


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